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ऍफ़यूइ केश ट्रांसप्लांटेशन तकनीक

ऍफ़यूइ केश ट्रांसप्लांटेशन तकनीक -

इसका पूरा नाम फॉलिक्युलर यूनिट एक्सट्रैक्शन है | | यह एक नए और पहले वाली सभी तकनीकों से एडवांस्ड और बढ़िया तकनीक है | पहले जितनी भी प्रकिर्यें थी जिनसे केशो का प्रतिरोपण या स्थानांतरण किया जाता था , उन सबके कोई न कोई नुकसान या उलट प्रभाव थे |

पुराणी तकनीकों के गलत प्रभाव

मरीज के सिर पर या जहाँ से भी बालो को स्थानांतरित करने के बाद लगया गया है , वह पर काफी चमड़ी काटनी पड़ती थी | बाद में घाव ठीक करने के लिए मरीज को काफी दवायां भी खानीं पड़ती थी |

कई बार चमड़ी को काट कर गंजेपन वाली जगह लगया जाता था तो यह चमड़ी पहले वाली चमड़ी से मेल नहीं खाती थी और अगल दिखाई देती थी |

इस पर्किर्या में मरीज को काफी दर्द सहन करना पड़ता था और कई बार तो दर्द काफी दिनों या हफ्तों तक भी रहता था |

इन सबसे बचने के लिए ऍफ़यूइ तकनीक बनायीं गए | इस तकनीक में बहुत छोटा सा ऑपरेशन होता है , जहा तक की चमड़ी को भी काटना नहीं पड़ता | सिर्फ बालों को ही सुखमदर्शी से देख कर चमड़ी से निकल लिया जाता है | फिर इन्ही बालों को गंजेपन वाली जगह पर प्रत्यारोपित कर दिया जाता है |

यह एक काफी संवेदनशील पर्किर्या है | इसके बारे में तब ज्ञान हुआ जब चकित्सकों ने देखा की अगर बालों को जड़ों समेत निकल कर किसी अन्य स्थान पर प्रत्यारोपित किया जाये तो वह उसी तरह विकास करते है जिस तरह की वह पहले अपनी कुदरती जगह पर विकास करते थे |

पर इस तकनीक से मरीज के सिर के केश को स्थानांतरित करने के लिए चित्सक को काफी ज्ञान होना चाहिए | कम से कम सर्जन उपाधि का कोई चित्सक ही इसे करने के लिए काबिल होता है | किसी छोटे चित्सक पर आप भरोसा नहीं कर सकते क्यूंकि इसमें बहुत क़ाबलियत और काफी महारत की जरूरत होती है | इसके बाद इनको अगल अलग करके प्रयोगशाला में इन में से सही और स्वस्थ केशों को अलग कर मरीज के शरीर में , जहाँ पर भी केशो की जरूरत है , वहां पर प्रतिरोपित कर दवाओं की मदद से सभी केशों को विकास करने के लिए तैयार किया जाता है |

ऍफ़यूइ केश ट्रांसप्लांटेशन तकनीक के फायदे

. चमड़ी पर किसी किसम के कोई निशान नहीं पडते क्यों की चमड़ी कहीं भी काटी या लगयी नहीं जाती | यह एक बहुत ही बड़ा फ़ायदा है | पुराणी सभी टेक्नीक्स में चमड़ी पर निशाम बनते थे , जिन्हे बाद में खतम होने पर काफी समय लगता था |

. पुराणी टेक्नीक्स के बदले नतीजे भी अच्छे आते है | जायदा से जायदा बाल बढ़ने लगते है और बालो के खराब होने का विकास रुकने के मौके बहुत काम होते हैं |

. सब कुछ माहिर चित्सक की देख रेख में होता है , इसी कारन किसी भी तरह के विकार या संक्रमण की सम्भावना बहुत काम होती है |